मॉडल शॉप के नीचे ‘मयखाना’! आधी रात बाद भी छलक रहे जाम?

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रेलवे रोड के बेसमेंट में कथित अवैध बार संचालन की चर्चा; आबकारी और पुलिस की चेकिंग पर उठे सवाल

सहारनपुर। शहर के सबसे व्यस्त और वीआईपी इलाकों में शामिल घंटाघर–रेलवे रोड पर स्थित एक मॉडल शॉप इन दिनों गंभीर आरोपों को लेकर चर्चाओं में है। आरोप है कि मॉडल शॉप के नीचे बने बेसमेंट में नियमों को ताक पर रखकर कथित रूप से बार जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं और देर रात तक ग्राहकों को शराब परोसी जाती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्धारित समय के बाद भी यहां कथित तौर पर शराब उपलब्ध कराने का सिलसिला जारी रहता है। चर्चा तो यहां तक है कि कुछ अधिक रकम चुकाने पर रातभर शराब परोसने की व्यवस्था कर दी जाती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई, रेलवे रोड पर मेहरबानी क्यों?

इस पूरे मामले ने आबकारी विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय टीमें समय-समय पर छोटे ढाबों, रेहड़ी-पटरी वालों तथा गांव-देहात की दुकानों पर चेकिंग कर कार्रवाई करती दिखाई देती हैं, लेकिन शहर के बीचोंबीच प्रमुख रेलवे रोड पर चल रही कथित गतिविधियां उनकी नजरों से कैसे बची हुई हैं?

लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस कथित खेल की जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?

मॉडल शॉप का लाइसेंस, फिर बेसमेंट में बार किसकी अनुमति से?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मॉडल शॉप को शराब की बिक्री का लाइसेंस मिलने के बावजूद उसके बेसमेंट में बार जैसी गतिविधियां किस नियम और किस अधिकारी की अनुमति से संचालित की जा रही हैं? क्या बेसमेंट में शराब बैठाकर पिलाने की अलग अनुमति ली गई है? अग्निशमन, सुरक्षा और अन्य आवश्यक मानकों का पालन हो रहा है या नहीं—इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह आबकारी नियमों की गंभीर अनदेखी के साथ-साथ विभागीय निगरानी पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।

अधिकारियों ने कहा—जांच के बाद होगी कड़ी कार्रवाई

आबकारी विभाग के अधिकारियों ने फिलहाल पूरे मामले से अनभिज्ञता जताई है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत और आरोपों की जांच कराई जाएगी। जांच में अनियमितता अथवा नियमों का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने क्षेत्र में अभियान चलाकर चेकिंग और सख्त एक्शन लेने की बात भी कही है।

अब देखना यह होगा कि विभाग वास्तव में बेसमेंट तक पहुंचकर निष्पक्ष जांच करता है या फिर कार्रवाई का दावा केवल कागजों और बयानों तक ही सीमित रह जाता है।

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