
सहारनपुर। स्मार्ट सिटी का तमगा हासिल कर चुके सहारनपुर में आज भी एक व्यवस्थित और स्थायी केंद्रीय बस अड्डा नहीं है। कभी घंटाघर के पास अंबाला रोड स्थित बस अड्डे से बसों का संचालन होता था, लेकिन उसे खाली कराकर वहां बहुमंजिला हैबिटेट सेंटर बना दिया गया। पुराने अड्डे का सुविधाजनक विकल्प समय पर तैयार नहीं होने के कारण अब रोडवेज बसों का संचालन तीन अलग-अलग स्थानों से हो रहा है और कई बसें सड़कों के किनारे खड़ी दिखाई देती हैं।
घंटाघर के पास था सुविधाजनक बस अड्डा
घंटाघर से करीब 150 मीटर दूर अंबाला रोड स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम के पास नगर निगम की जमीन पर वर्षों तक रोडवेज बस अड्डा संचालित होता था। शहर के लोग इसे घंटाघर या अंबाला रोड बस स्टैंड के नाम से जानते थे।
रेलवे स्टेशन, घंटाघर और प्रमुख बाजार नजदीक होने के कारण यात्रियों को यहां पहुंचने में सुविधा होती थी। हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली और जिले के विभिन्न क्षेत्रों की बसें भी यहां से आसानी से मिल जाती थीं।
बस अड्डे की जमीन पर बना हैबिटेट सेंटर
वर्ष 2018 में नगर निगम ने पुराने बस अड्डे की जमीन पर कमर्शियल शॉपिंग और ऑफिस कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना तैयार की थी। बाद में स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत करीब 49 करोड़ रुपये की लागत से यहां चार मंजिला हैबिटेट सेंटर का निर्माण कराया गया।
हैबिटेट सेंटर में पार्किंग, दुकानें, शोरूम, निजी कार्यालय, मीटिंग हॉल और एग्जीबिशन हॉल जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इस परियोजना से नगर निगम को आमदनी होने की उम्मीद है, लेकिन सवाल यह है कि जिस स्थान से वर्षों तक हजारों यात्रियों को परिवहन सुविधा मिलती थी, उसे खाली कराने से पहले समान सुविधाओं वाला स्थायी विकल्प क्यों नहीं बनाया गया?
पहले अड्डा खाली कराया, फिर विकल्प तलाशते रहे अधिकारी
फरवरी 2022 में पुराने अंबाला रोड बस अड्डे को खाली कराकर संचालन मानकमऊ स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया। उस समय मानकमऊ बस अड्डे पर यात्रियों के बैठने, पेयजल और उचित आवागमन जैसी आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं थीं।
इसके बाद यात्रियों को बस पकड़ने के लिए घंटाघर, रेलवे रोड, अंबाला रोड और गांधी पार्क के चक्कर लगाने पड़े। बस अड्डे के स्थानांतरण को लेकर नगर निगम और परिवहन निगम के अधिकारियों के बीच मतभेद भी सामने आए। इस अव्यवस्था का खामियाजा यात्रियों को अतिरिक्त किराया खर्च करके और घंटों इंतजार करके भुगतना पड़ा।
सड़क किनारे बसें, कैसे नहीं लगेगा जाम?
स्थायी केंद्रीय बस अड्डा नहीं होने के कारण रेलवे रोड सहित कई स्थानों पर रोडवेज बसें सड़क किनारे खड़ी रहती हैं। यात्रियों को बैठाने और उतारने के दौरान सड़क का बड़ा हिस्सा बाधित हो जाता है, जिससे पीछे आने वाले वाहन फंस जाते हैं।
रेलवे रोड पहले ही शहर का अत्यधिक व्यस्त मार्ग है। यहां से रेलवे स्टेशन, घंटाघर, जनमंच, अंबाला रोड और प्रमुख बाजारों की ओर बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि पुराने बस अड्डे के बंद होने के बाद समस्या समाप्त होने के बजाय कई स्थानों पर फैल गई है। पहले बसें निर्धारित परिसर में खड़ी होती थीं, जबकि अब यात्रियों को लेने और उतारने के लिए सड़क का इस्तेमाल किया जा रहा है।
तीन स्थानों में बंट गई बस सेवा
वर्तमान में सहारनपुर की रोडवेज बस सेवा रेलवे रोड, दिल्ली रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी और मानकमऊ से संचालित हो रही है। रेलवे रोड से देहरादून, हरिद्वार, मेरठ, अलीगढ़ और आगरा; कांशीराम कॉलोनी से शामली, बागपत और दिल्ली, जबकि मानकमऊ से नकुड़, गंगोह, यमुनानगर, अंबाला और लुधियाना की बसें मिलती हैं।
बाहर से आने वाले यात्रियों को अक्सर पता नहीं होता कि उनके गंतव्य की बस किस स्थान से मिलेगी। स्पष्ट संकेतक, केंद्रीय पूछताछ केंद्र और एकीकृत समय-सारिणी नहीं होने के कारण यात्रियों को सामान और बच्चों के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक भटकना पड़ता है।
फरवरी 2026 में मानकमऊ रोडवेज बस स्टैंड का विधिवत उद्घाटन किया गया। इससे कुछ मार्गों के यात्रियों को राहत मिली, लेकिन सभी प्रमुख मार्गों की बसों और आवश्यक यात्री सुविधाओं वाला केंद्रीय अड्डा अब भी नहीं मिल पाया।
टेंडर हो गया, नया आईएसबीटी कब बनेगा?
दिल्ली रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी के पास शाकंभरी विहार में करीब 8,013.95 वर्ग मीटर भूमि पर आधुनिक अंतरराज्यीय बस अड्डा प्रस्तावित है। परिवहन निगम ने यह जमीन आवास विकास परिषद से करीब 37 करोड़ रुपये में खरीदी है।
जून 2026 में निर्माण का टेंडर होने के बाद जुलाई में शिलान्यास के साथ काम शुरू करने का दावा किया गया था। लेकिन 19 अगस्त 2026 तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया। अधिकारियों ने बारिश को इसकी वजह बताते हुए मौसम ठीक होने पर भूमि पूजन कराने की बात कही थी।
अब शहर की जनता जानना चाहती है कि नए आईएसबीटी का निर्माण वास्तव में कब शुरू होगा, इसे पूरा करने की निश्चित समयसीमा क्या है और तब तक सड़क किनारे खड़ी बसों तथा उनसे पैदा होने वाले जाम का समाधान कौन करेगा?
पुराना बस अड्डा हट गया, हैबिटेट सेंटर बन गया—लेकिन सहारनपुर का यात्री आज भी अपने स्थायी बस अड्डे का इंतजार कर रहा है।








