
जिले में बच्चों की मौत और घायलों के मामले सामने आए; शहर में नसबंदी और टीकाकरण अभियान के बावजूद शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई को लेकर सवाल
नेशन प्रिज्म | सहारनपुर
घर से खेलने निकला बच्चा सुरक्षित लौटेगा या नहीं—सहारनपुर के कई परिवारों के लिए यह चिंता बन गई है। छह सितंबर को बिहारीगढ़ क्षेत्र के मदनपुरा गांव में आठ वर्षीय अजीम की कुत्तों के झुंड के हमले में मौत हो गई। इससे पहले अप्रैल में जिले के फतेहपुर थाना क्षेत्र में आठ वर्षीय लवीश की भी ऐसे ही हमले में जान गई थी। ये दोनों घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों की हैं, लेकिन इन्होंने पूरे जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
खतरे का अंदाजा अस्पताल पहुंचने वालों की संख्या से भी लगता है। सितंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एसबीडी जिला अस्पताल में हर महीने चार हजार से अधिक लोग एंटी रेबीज टीका लगवाने आते हैं। यह आंकड़ा पूरे जिले से अस्पताल पहुंचने वालों का है, केवल नगर निगम क्षेत्र में हुए हमलों का नहीं।
शहर में लोगों की शिकायत है कि गलियों में कुत्तों के झुंड और हमले की आशंका की सूचना देने पर भी उन्हें समय पर राहत नहीं मिलती। नगर निगम से सवाल यह है कि शिकायत दर्ज होने के बाद मौके पर टीम कितनी जल्दी पहुंचती है? जिन स्थानों से बार-बार शिकायतें आती हैं, वहां क्या कार्रवाई हुई और शिकायतकर्ता को उसकी जानकारी दी गई?
नगर निगम की ओर से नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। मई में निगम ने 25 वार्डों में 18 हजार कुत्तों के टीकाकरण और 25,785 की नसबंदी की जानकारी दी थी। सितंबर की एक रिपोर्ट में अब तक 27 हजार कुत्तों की नसबंदी और 36 हजार के टीकाकरण का उल्लेख है। इन प्रयासों के बीच नागरिकों की शिकायतों पर असरदार और समयबद्ध जवाब मिलना भी उतना ही जरूरी है। टीकाकरण रेबीज से बचाव का उपाय है; यह कुत्तों के काटने की घटनाओं को अपने आप नहीं रोकता।
जवाबदेही तय करने के लिए नगर निगम को वार्डवार शिकायतें, टीम पहुंचने का समय और की गई कार्रवाई सार्वजनिक करनी चाहिए। स्कूलों और उन गलियों को प्राथमिकता मिले जहां बच्चों पर हमले हुए हैं या बार-बार शिकायतें दर्ज हुई हैं। ग्रामीण इलाकों में संबंधित पंचायतों और जिला प्रशासन को भी संसाधनों और कार्रवाई की स्पष्ट व्यवस्था बतानी होगी।
सवाल सीधा है: अभियान के आंकड़े बढ़ रहे हैं, तो शिकायत करने वाले परिवारों को अपनी गली में सुरक्षा का भरोसा कब मिलेगा?








